सोमवार, 3 अगस्त 2009

भाई

रक्षा बंधन के पावन पर्व पर मेरे भाई और भाई -बहिन के पवित्र रिश्ते को समर्पित एक कविता.


पिता के सपनों का संसार,
आधा आधा बांटा प्यार,
नन्हा शिशु, माँ आँचल में,
पेड़ आम का, आँगन में,
रेशमी धागा,नेह की रीत,
प्रेम की डोरी, सच्चा मीत,
बहना होती उसकी प्यारी,
ली रक्षा की जिम्मेदारी,
रोली, कुमकुम और चन्दन,
बहिन ने बाँध दिया बंधन.
कोमल रिश्ता, दर्पण सा,
बना आधार नव जीवन का.

पूजा

6 टिप्‍पणियां:

  1. पूजा जी,,
    बहुत सुंदर लिखा है आपने...
    आपकी पहले वाली कविता भी अच्छी थी पर मुझे जाने क्यों..
    ज़रा भयावह लगी ...
    बहिन ने बाँध दिया बंधन.
    कोमल रिश्ता, दर्पण सा,.

    मुझे बहुत प्यारे भाव लगे....मन से तारीफ़ करता हूँ......
    बहुत-बहुत-बहुत सुंदर भाव.....
    मेरी बधाई कबूल फ़रमाएँ ...

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  2. पूजा जी,
    आपकी कविता बहुत सुंदर है.

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

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  3. कोमल रिश्ता, दर्पण सा,
    बना आधार नव जीवन का.
    बहुत अच्छी रचना --

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  4. kuch anmol rishte jinhe pane k liye taraste hain fariste...:)

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  5. achi kavita pooja ji....... bhai behan ka pyaara rishta kuch anokha saa hotaa hai.......... chahae dukh ho ya sukh .... pavitr abd pyaraa saa rishtaa hotaa hai jo ek dor ussai yaani rakhiii ussai behen ka hoani ka ehshaas diltaai hai duur ho ya paass........ bahuut badiyaa dhanya vaad:):)

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