बुधवार, 15 मार्च 2023

मनप्रिया

जब सोच लो पूरी तरह 

दुनिया को इस छोर से उस छोर तक, 

तब भीतर के सारे झंझावात 

लहराते समुन्दर बन जाएँगे, 

आँखों से बरसेंगे बचे खुचे बादल 

और अचानक ही साफ़ हो जाएगा, 

सब तरफ़, सब कुछ, 

सोनार धूप खिलने लगेगी,

उस पल में ये सुनहरी भोर सी लड़की 

मन में रहस्यमय मुस्कुरा देगी,

कहेगी, ओ! मन के ओटे पर झूमती,

घूंघर श्यामा बनसखी! 

सौम्य अधखुले नेत्रों वाली,

आत्मविस्तृत कंठमणि!

मैं जन्मों से पहचानती हूँ जिसे

हाँ, वही तो हो तुम छन छन ध्वनि ! 

-पूजा अनिल

6 टिप्‍पणियां:

  1. घूंघर श्यामा बनसखी!

    सौम्य अधखुले नेत्रों वाली,

    आत्मविस्तृत कंठमणि!

    मैं जन्मों से पहचानती हूँ जिसे

    हाँ, वही तो हो तुम छन छन ध्वनि !
    .. उम्दा प्रस्तुति

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  2. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति है।
    जय हिन्द जय भारत

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