Tuesday, February 22, 2011

एक हाथ दूरी

तुम्हारा एक हाथ जितना दूर हो जाना
मेरे लिये सदियों की दूरी हो जाना हुआ करता ,
तुम जब अपने नाराज़ होने की बात कहते,
इन मीन सी आँखों से बरसता जल,
जानते हुये भी कि जल बिन नहीं रह पाती मीन ,
मैं सूख जाने को तैयार रहती,
तुम और उदास हो जाया करते , मैं और सूख जाती....
क्यारियों में दम तोड़ते पादप और निढाल पड़ी "मैं" ,
एक साथ प्रार्थना में संलग्न हुआ करते,
जाने कैसे हम दोनों की प्रार्थना एक साथ स्वीकार हुआ करती!!
तुम्हें याद आता कि आज शाम क्यारी में पानी डालना भूल गये हो...
उसे याद आता कि "मैं" सूख रही हूँ,
और मुझे जीवन दान मिल जाता.
मेरा खिला चेहरा और तुम्हारा हमेशा का सवाल, "अब क्या हुआ?"
क्यारी और मुझे एक साथ सींचने के लिये
एक हाथ दूरी का मिटना जरूरी हो जाता.
बाहर की वर्षा में भीगती क्यारी
और
भीतर हम दोनों प्यार की वर्षा में खोए खोए
किया करते .....
हाथ भर की दूरियों को सदा दूर रखने का वादा .

5 comments:

  1. एक हाथ की दूरी में फिसलती ज़िंदगी का एहसास।

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  2. बहुत सोचने पर मजबूर करती है कविता.....
    कविता, जो एक कहानी सी कहती लगती है...कहानी के पात्रों के काल्पनिक रूप तैयार करती है...


    जाने कैसे हम दोनों की प्रार्थना एक साथ स्वीकार हुआ करती!!
    तुम्हें याद आता कि आज शाम क्यारी में पानी डालना भूल गये हो...
    उसे याद आता कि "मैं" सूख रही हूँ,
    और मुझे जीवन दान मिल जाता.

    बहुत सुन्दर लिखा है आपने.....

    बधाई हो...

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  3. nicely created .............which is always beyond words(always in vacuum ) .aise shabdon ki pitaari hamesha bhari rahe pooja .

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  4. aaj hindi me likhne ka man nahi hai ..........isliye maaf kardena dost.

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  5. यह कविता एक शाम क्यारी में पानी न देने के माने समझाती है। यह जानते हुए भी कि नहीं रह पाती जल बिन मीन। फिर भी पानी न देने का मतलब है उसे जबरन सूखने के लिए मजबूर करना... एक शाम क्यारी में पानी न देने का मतलब है रिश्तों को अनिवार्य खाद से वंचित रखना, उसका धीरे-धीरे एक आदत में बदलते जाना। क्योंकि आदत कभी बदलती नहीं और जो बदल जाए वो आदत नहीं।

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