मेरे भाई गौरव ने आज पहली बार एक कविता लिखी और मुझे भेजी. जीवन के छुए अनछुए पहलु अपनी झलक दिखा कर हम सभी के अन्दर छिपे एक कलाकार को कभी ना कभी बाहर ले ही आते हैं, ऐसा ही कुछ इनके साथ भी हुआ. और उसी कवित्व भाव को बनाए रखने के लिये और उभरती प्रतिभा को निखारने के लिये अपने ब्लॉग पर पहली बार किसी और की कविता पोस्ट कर रही हूँ . आप सभी से स्नेह बनाए रखने की उम्मीद करती हूँ. धन्यवाद.
जिंदगी भी एक अजीब तमाशा है..
कभी आशा है कभी निराशा है.. !!
आँखे खुली हो तो उम्मीद नज़र आती है
और ये बंद आँखों मैं भी सपना दे कर जाती है..!!
क्या शिकायत है अपनों से ,
गिला है अपने ही सपनो से ...!!
बूढी दादी की वो कहानियाँ अब कहाँ हकीकत बताती है.
सपने वाली वो परी अब कहाँ रोज़ मिलने आती है ...!!
इस जिंदगी की रफ़्तार मैं मैंने खो दिया अपनों को,
ख़ुशी के सागर की तलाश मैं मैंने खोया छोटे छोटे सपनो को ..!!
आज जब उम्र ढल रही,
जिंदगी की वो तमाम बातें याद आती है ..!!
कभी ख़ुशी के वो पल आँखों मैं आंसू ले आते हैं,
कभी गम के सागर मैं खुद को तनहा पातें हैं..!!
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गौरव की कविता अच्छी लगी. बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ. उन्हें नियमित लिखने हेतु प्रेरित करें.
ReplyDeleteगौरव जी को शुभकामनाएँ!
ReplyDeleteआपको धन्यवाद!
गौरव जी की पहली कविता ही लाजवाब है आगे क्या होगा बहुत बहुत बधाई दोनो भाई बहिन को ।
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteआज मेरे पास कोई शब्द नहीं है बोलने के लिए आप से ...
ReplyDeleteऐसा मैंने कभी सोचा भी न था की मैं कभी कुछ ऐसा भी लिख सकता हु... ये तो बस एक अशांत मान की बात थी जो मैं सब्दों मैं व्यक्त कर दिया है.... और पूजा दीदी ने उसे कविता का रूप दे दिया...
मैं आप सभी का आभारी हु.. खाश कर Udan Tashtari जी, डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी , और निर्मला कपिला जी...
और पूजा दीदी का आभार व्यक्त करने को हमारे आप शब्द ही नहीं है
जय गुरु देव :-)
बहुत खूब गोरवजी,
ReplyDeleteआपकी पहली कविता में ही बड़े बड़े कवियों से विचार और आपका गहरा दर्शन झलक रहा है!
निः संदेह आप आगे चलकर साहित्य जगत में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त करेंगे ..!!
आपके उत्तरोत्तर उन्नत लेखन के लिए शुभकामनाए ....
http://kavyamanjusha.blogspot.com/
कविता कि पहली लाईने साधारण सी लगीं...
ReplyDeleteलेकिन....
आँखे खुली हो तो उम्मीद नज़र आती है
और ये बंद आँखों मैं भी सपना दे कर जाती है..!!
क्या शिकायत है अपनों से ,
गिला है अपने ही सपनो से ...!!
बहुत गहराई तक उतर गयीं....,,,,,
गिला है अपने ही सपनों से......वाह...