"ए! तुम!!"
"रुक जाओ!!"
जैसे जैसे आवाज़ पास आ रही थी, उसके कदम और तेजी से आगे बढ़ रहे थे, पर पीछा करने वाले के कदमों की गति हवा की तरह रही होगी जो पल भर में ही उसके पास पहुँच कर उसे पीछे से पकड़ लिया... उसने डर के मारे पीछे मुड कर देखना भी गवारा नहीं किया.
"तुम भाग क्यों रहे थे?"
"मैंने कुछ नहीं किया है साहब.... ",उसकी आवाज़ रोने सी हो रही थी....
"फिर भागे क्यों?" पीछा करने वाले की नरम आवाज़ सुनकर अबकी बार उसने पीछे मुड कर देखा. सूट- बूट में सभ्य और शालीन एक व्यक्ति उसकी बांह पकड़ कर उस से सवाल कर रहा था.
"साहब , वो ... वो प्रीती है ना.... कहती है, उसे मर्सडीज़ लाकर दूं तो ही मुझसे ब्याह करेगी, अपुन के पास तो पैसा है नहीं, आपकी गाडी खड़ी थी तो बस उसे ही देख रहा था कि मर्सडीज़ कैसी होती है.... सपना देखने का पैसा नहीं लगता ना साहब??? पर यह छोकरी लोगों को कौन समझाए कि पैसा पेड़ पर नहीं लगता..." भय को खोये हुये ज़माना गुजर गया और वो इस तरह पीछा करने वाले से बात कर रहा था जैसे जन्मों से जानता हो.
पीछा करने वाले को हंसी आ गई, और वो उस लड़के को साथ लेकर एक पेड़ के नीचे बैठ गया ,"क्या नाम है तुम्हारा?"
"मनीष..... साहब आपकी शादी की हुई है?"
"हाँ..."
"फिर आप इत्ती रात गये इधर काहे ? आपको तो अभी अपनी बीवी के साथ होना मांगता न!!!"
"ह्म्म्म ....होना तो मांगता......"
"बस बस, मैं समझ गया साहब...यह छोकरी लोगों को कित्ता भी दो , कभीज़ खुश नहीं होती, तब्बी तो आपके जैसे बाबू लोग भी रात गये सड़कों पे भटकते फिरते हैं...क्यों?? है ना यहीच बात!!!!"
उसे फिर से हंसी आ गई," नहीं मनीष, ऐसी कोई बात नहीं है, मेरी बीवी बहुत समझदार है और बहुत अच्छी भी, मेरा ऑफिस घर के पास में ही है, तो कभी कभी काम करते देर हो जाती है, तुम्हे अपनी गाडी के पास देखा तो तुम्हारा पीछा करते यहाँ आया और तुमसे निपटने को रुक गया."
"समझे क्या???" अबके उसने भी मनीष की टपोरी भाषा में बोला और खुद ही हंस पड़ा .
उसके साथ मनीष भी हंसा और कहा,"साहब, आपकी बीवी शिकायत नहीं करेगी इत्ती देर से घर जाओगे तो?
"हाँ, शिकायत तो करेगी पर मैं प्यार से उसे मना लूँगा."
"यहीच लफडा अपुन को नहीं पालना, पहले शादी करो, फिर नखरे सहो और फिर मनाते रहो जीवन भर... मनाना बोले तो मस्का पोलिश...है ना साहब? अरे वो अपनी प्रीती है ना...वो भी बात बात पर रूठ जाती, फिर बोलती आज आइस क्रीम खिलाओ , आज सिनेमा चलो, आज चोक्लेट ले आओ, आज नया ड्रेस दिलाओ .... और भी ना जाने क्या क्या!!! आज नवी फरमाइश करती है कि मर्सडीज़ चाहिए, तुम ही कहो साहब, मैं एक छोटी दूकान में नौकरी करने वाला, ऐसी गाडी किधर से लाएगा? अपुन ने तो डीसाइड कर लिया है कि अपुन कभी शादीच नहीं करेगा, क्यों साहब करेक्ट सोचा ना?"
"मनीष , मेरे भई, शादी को लोग एक लोटरी कहते हैं, शादी के बाद किसी का जीवन संवर जाता है और किसी का घर तबाह हो जाता है, पर एक बात सच है कि अगर ये छोकरी लोग ना हो तो आदमी का जीवन एकदम नीरस हो जाये, तुम कुछ भी फैसला करने से पहले सोचो तो सही कि वो तुम्हारी प्रीती है तो तुम उसके साथ कितने खुश रहते हो, क्यों है ना सच?
मनीष शरमाकर गर्दन नीचे करके बोला, " सच्ची साहब, वो होती है तो हम दोनों कितनी बातें करते हैं, कभी कभी चौपाटी पर घुमने भी जाते हैं, और दोनों ही खुश रहते हैं, मेरे को मालूम है कि वो कभी भी कुछ भी मांगती पर दिल की बड़ी अच्छी है साहब , वो दिन मेरेको बुखार आया तो पूरी रात मेरी सेवा की, मेरी आई बोलती कि, मनु, तेरे जैसे गधे को इतनी समझदार लड़की किधर से मिली रे? ".
"वो तो आई को मैंने हीच रोक रखा है, उसका बस चले तो आज ही मेरी शादी करा डाले"
फिर वो सुनसान, पथिक हीन सड़क उन दोनों के गूंजते कहकहों की गवाह बन गई .
"मनीष, तुम कभी आना मेरे ऑफिस, कोई अच्छी नौकरी मिली तो दिलाऊंगा तुम्हे. यह मेरा विसिटिंग कार्ड रख लो."
"थेंक यू साहब जी , जरूर आऊंगा."
दोनों विदा लेकर अपने अपने घर की और चल देते हैं.
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क्रमशः ......
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