रक्षा बंधन के पावन पर्व पर मेरे भाई और भाई -बहिन के पवित्र रिश्ते को समर्पित एक कविता.
पिता के सपनों का संसार,
आधा आधा बांटा प्यार,
नन्हा शिशु, माँ आँचल में,
पेड़ आम का, आँगन में,
रेशमी धागा,नेह की रीत,
प्रेम की डोरी, सच्चा मीत,
बहना होती उसकी प्यारी,
ली रक्षा की जिम्मेदारी,
रोली, कुमकुम और चन्दन,
बहिन ने बाँध दिया बंधन.
कोमल रिश्ता, दर्पण सा,
बना आधार नव जीवन का.
पूजा