निश्छल, सरल, मासूम प्यार की तस्वीर तुमको दिखलाऊं,
पर राधा- कान्हा के प्रेम को सशरीर कहाँ से ले आऊं??
मैं कहूं, सांस की उर्जा में , कुदरत का प्यार समाया है,
तुम साँसों के जरिये प्यार जताने, निकट चले आते हो...
मैं कहूं, मुस्काती आँखों में , ईश्वर ने प्यार बसाया है,
तुम कहो, जाम का प्याला इन्हें, पीने को ललचाते हो...
मैं चाहूं शाश्वत सत्य सा प्यार, मेरी प्रार्थना है खामोशी,
तुम रूप की पूजा करने वाले, क्षणिक मिलन से पाओ ख़ुशी....
विकसित इस मस्तिष्क पटल में, भोलापन कैसे लाऊँ???
यदि तुम बालक बन जाओ, तुम्हे प्यार का मतलब समझाऊं ...