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मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011

एक हाथ दूरी

तुम्हारा एक हाथ जितना दूर हो जाना
मेरे लिये सदियों की दूरी हो जाना हुआ करता ,
तुम जब अपने नाराज़ होने की बात कहते,
इन मीन सी आँखों से बरसता जल,
जानते हुये भी कि जल बिन नहीं रह पाती मीन ,
मैं सूख जाने को तैयार रहती,
तुम और उदास हो जाया करते , मैं और सूख जाती....
क्यारियों में दम तोड़ते पादप और निढाल पड़ी "मैं" ,
एक साथ प्रार्थना में संलग्न हुआ करते,
जाने कैसे हम दोनों की प्रार्थना एक साथ स्वीकार हुआ करती!!
तुम्हें याद आता कि आज शाम क्यारी में पानी डालना भूल गये हो...
उसे याद आता कि "मैं" सूख रही हूँ,
और मुझे जीवन दान मिल जाता.
मेरा खिला चेहरा और तुम्हारा हमेशा का सवाल, "अब क्या हुआ?"
क्यारी और मुझे एक साथ सींचने के लिये
एक हाथ दूरी का मिटना जरूरी हो जाता.
बाहर की वर्षा में भीगती क्यारी
और
भीतर हम दोनों प्यार की वर्षा में खोए खोए
किया करते .....
हाथ भर की दूरियों को सदा दूर रखने का वादा .