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माँ के बहाने चाँद
चाँद रोए तो क्या धरती भीगेगी?
मेरी ज़मीन की मिट्टी
जो बंजर सी दिखती है,
क्या चंद्र नयन जल से तृप्त हो,
फलों के बग़ीचे उपजाएगी?
शिशिर ऋतु में,
माँ के कहने पर,
रखी थी खीर शरद पूर्णिमा
की चाँदनी में,
खीर में चाँद का पीलापन
बचा रहा,
मैंने वह अमृत पेय माँ को
समर्पित किया और
चाँद को भेजा अश्रु जल,
क्या चाँद वहाँ भीगा होगा?
-पूजा अनिल